लियो टॉल्साटॉय | Leo Tolstoy
जन्म
9 सितम्बर 1828
leo-tolstoy-rossin-1394676361_org.jpg
जन्मस्थान
मास्को से लगभग 100 मील दक्षिण मैत्रिक रियासत यास्नाया पौल्याना में हुआ था।
मृत्यु
20 नवम्बर 1910 (अस्तापवा नामक एक छोटे से रेलवे स्टेशन)
माता-पिता
इनकी माता पिता का देहांत इनके बचपन में ही हो गया था।
अभिभावक
लियो का लालन पालन इनकी चाची तत्याना ने किया।
शिक्षा
रूस के एक संपन्न परिवार में जन्म होने के कारण उच्चवर्गीय ताल्लुकेदारों की भॉति इनकी शिक्षा के दीक्षा के लिये सुदक्ष विद्वान् नियुक्त थे। घुड़सवारी, शिकार, नाच-गान, ताश के खेल आदि विद्याओं और कलाओं की शिक्षा इन्हें बचपन में ही मिल चुकी थी। चाची तात्याना इन्हें आदर्श ताल्लुकेदारों बनाना चाहती थी और इसी उद्देश्य से, तत्मालीन संभ्रात समाज की किसी महिला को प्रेमपात्री बनाने के लिये उसकाया करती थीं। युवावस्था में तॉलस्तॉय पर इसका अनुकूल प्रभाव ही पड़ा। पर तॉलस्तॉय का अंत:करण इसे उचित नहीं समझता था। अपनी डायरी में उन्होंने इसकी स्पष्ट भर्त्सना की है। 1844 में तॉलस्तॉय कज़ान विश्वविद्यालय में प्रविष्ट हुए और 1847 तक उन्होनें पौर्वात्य भाषाओं और विधिसंहिताओं (कानून) का अध्ययन किया। रियासत के बँटवारे का प्रश्न उपस्थित हो जाने के कारण स्नातक हुए बिना ही इन्हे विश्वविद्यालय छोड़ देना पड़ा।
कार्यक्षेत्र
1851 में तॉलस्तॉय कुछ समय के लिये सेना में भी प्रविष्ट हुए थे। उनकी नियुक्ति कोकेशस में पर्वतीय कबीलों से होनेवाली दीर्घकालीन लड़ाई में हुई जहाँ अवकाश का समय वे लिखने पढ़ने में लगाते रहे। यहीं पर उनकी प्रथम रचना चाइल्डहुड 1852 में निर्मित हुई जो एल0 टी0 के नाम से "टि कंटेंपोरेरी" नामक पत्र में प्रकाशित हुई। उस रोमैंटिक युग में भी इस नीरस यथार्थवादी ढंग की रचना ने लोगों को आकृष्ट किया और उसके रचनाकार के नाम के संबंध में तत्कालीन साहित्यिक तरह तरह के अटकल लगाने लगे थे।
1854 में तॉलस्तॉय डैन्यूब के मोर्चे पर भेजे गए; वहाँ से अपनी बदली उन्होने सेबास्तोपोल में करा ली जो क्रीमियन युद्ध का सबसे तगड़ा मोर्चा था। यहाँ उन्हें युद्ध और युद्ध के संचालकों को निकट से देखने परखने का पर्याप्त अवसर मिला। इस मोर्चे पर वे अंत तक रहे और अनेक करारी मुठभेड़ों में प्रत्यक्षत: संघर्षरत रहे।  
कृतियाँ
सेबास्टोपोल स्केचेज, युद्ध और शान्ति, वार ऐंड पीस, अन्ना कैरेनिना और दि डेथ आव इवैन ईलियच, अन्ना कैरेनिना, कनफेशन, रिसरेक्शन।
सम्मान
1855 में उन्होने पीटर्सवर्ग की यात्रा की जहाँ के साहित्यिकारों ने इनका बड़ा सम्मान किया। 1857 ओर 1860-61 में इन्होंने पश्चिमी यूरोप के विभिन्न देशों का पर्यटन किया। परवर्ती पर्यटन का मुख्य उद्देश्य एतद्देशीय शिक्षापद्धतियों और दातव्य संस्थाओं के संघटन और क्रियाकलापों ही जानकारी प्राप्त करना था। इसी यात्रा में उन्हे यक्ष्मा (टीबी) से पीड़ित अपने बड़े भाई की मृत्यु देखने को मिली। घोरतम यातनाओं के अनंतर होनेवाली यक्ष्माक्रांत भाई की मृत्यु का तॉलस्तॉय पर मर्मातक प्रभाव पड़ा। वार ऐंड पीस, अन्ना कैरेनिना और दि डेथ आव इवैन ईलियच में मृत्यु के जो अत्यंत मार्मिक चित्रण मिलते हैं, उनका आधार उपर्युक्त घटना ही रही है


Axact

Akshaya Gaurav

hindi sahitya, hindi literature, hindi stories, hindi poems, hindi poetry, motivational stories, inspirational stories, हिन्दी साहित्य, कहानियाँ, हिन्दी कविताएँ, काव्य, प्रेरक कहानियाँ, प्रेरक कहानियाँ, व्यंग्य

loading...

POST A COMMENT :